Aircraft Cabin Pressure14000 पर 186 पैसेंजर्स की जान खतरे में पड़ी

जेट एयरवेज़ 900697 फ्लाइट जो कि मुंबई से जयपुर जा रहा था। प्लेन के टेकऑफ के बाद ही प्लेन में एयर प्रेशर की कमी होने लगी और Aircraft cabin में बैठे 186 पैसेंजर्स को सांस लेने में प्रॉब्लम होने लगी इसके बाद कुछ पैसेंजर्स के नाक से खून निकलना भी शुरू हो गया था।

उस समय प्लेन 14000 फिट के ऐल्टिट्यूड में फ्लाई कर रहा था पायलट ने Bleed air जो कि प्लेन में ऑक्सीजन सप्लाई करता है उसे ऑन करना भूल गया था, जिसके कारण 186 पैसेंजर्स की जान खतरे में पड़ चुका थी।

जब पायलट को अपनी गलती का पता चला तब पायलट प्लेन को वापस मुंबई के रनवे में इमर्जेंसी लैंडिंग करा देता है पर ये तो हुई न्यूस की बात अब हम जानेगे इस न्यूस से जुड़ी ऐसी बातें जिसे आपने किसी भी न्यूज़ चैनल में देखा या सुना नहीं होगा

Aircraft Cabin Pressure कैसे काम करता है।

जब प्लेन ग्राउंड में होता है तो Aircraft cabin के अंदर का प्रेशर और Atmospheric pressure एक समान होता है लेकिन जब प्लेन दस हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचता है तो सारे हालात बदल जाते हैं। लेकिन जैसे-जैसे विमान और ज्यादा ऊंचाई पर पहुंचता है, तब भी प्लेन के अंदर का प्रेशर ग्राउंड के प्रेशर के बराबर ही रहता है जबकि Atmospheric pressure डाउन हो जाता है।

अब क्योंकि Aircraft cabin में बैठे सभी 186 यात्री ऑक्सीजन का इस्तेमाल सांस लेने में कर रहे हैं और कार्बन डाइऑक्साइड गैस रिलीज कर रहे हैं ऐसे में प्लेन के अंदर ऑक्सीजन की कमी होने लगती है जिसे पूरा करने के लिए पायलट Bleed air नाम के एक स्विच को ऑन रखता है।

ये स्विच इंजिन से एयर को खींच के Aircraft cabin में सप्लाई करता है लेकिन Jet Airways के केस में ऐसा नहीं था। प्लेन के अंदर सभी यात्री ऑक्सीजन का इस्तेमाल तो कर रहे थे, लेकिन पायलट ने Bleed air के स्विच को ऑन नहीं किया था।

जिसके कारण Jet Airways में लगातार ऑक्सीजन की कमी होने लगी और केबिन में ऑक्सीजन की जगह कार्बन डाइऑक्साइड गैस भरने लगी।

Aircraft cabin के अंदर ऑक्सीजन की कमी होते ही इमर्जेंसी ऑक्सीजन मास्क खुल जाता है और सभी यात्री सांस लेने लगते हैं यहाँ पर अगर हम ध्यान दें तो Aircraft cabin के अंदर ऑक्सीजन की जगह कार्बन डाइऑक्साइड गैस भर रही थी। यानी की प्लेन के अंदर का प्रेशर अब भी ग्राउंड के जैसा ही होना चाहिए था, लेकिन एयरवेज़ के साथ ऐसा नहीं था ऑक्सीजन के खत्म होने के साथ साथ केबिन का प्रेशर भी डाउन हो रहा था, क्योंकि प्लेन में आउट फ्लो बल होता है जो पैसेंजर्स के द्वारा एग्ज़ॉस्ट किए हुए गैस को प्लेन से बाहर निकालता है।

इसी आउट फ्लो बल की वजह से जेट एयरवेज़ के अंदर एयर प्रेशर लगातार डाउन होते जा रहा था, जिसकी वजह से पैसेंजर्स के नाक से खून निकलना शुरू होने लगा दरअसल ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे शरीर में तरल रक्त के रूप में प्रवाहित होता है और रक्त के इस प्रवाह को जारी रखने के लिए एकसमान दबाव की आवश्यकता होती है।

अगर आस पास का प्रेशर डाउन हो जाता है तो ब्लड का प्रेशर Atmospheric pressure से अधिक हो जाएगा और ब्लड बाहर लो प्रेशर की और आने की कोशीश करने लगेगा जिसमें सबसे आसान रास्ता नाक होता है इसलिए जेट एयरवेज़ के पैसेंजर्स के नाक से खून निकलना शुरू होने लगा था।

इससे हम एक एग्ज़ैम्पल से भी समझ सकते हैं जब एक बलून में Liquid या फिर एयर को भरके इसके माउथ को ओपन कर देते हैं तो इसके अंदर का सारा मैटीरियल बाहर लो प्रेशर की ओर आने की कोशीश करने लगता है ठीक ऐसा ही जेट एयरवेज़ के पैसेंजर्स के साथ हुआ था।

ऑक्सीजन मास्क के बावजूद भी सारे पैसेंजर्स Uncomfortable फील कर रहे थे क्योंकि आउट फ्लो बल के जरिए प्लेन के अंदर का एयर बाहर जा रहा था, जिसकी वजह से Aircraft cabin का प्रेशर लगातार डाउन हो रहा था और किसी भी इंसान को सर्वाइव करने के लिए ऑक्सीजन और एयर प्रेशर दोनों मेंटेन रखना पड़ता है।

इसलिए तो स्पेस में जाने वाले सभी अंतरिक्ष यात्रियों को पूरा का पूरा स्पेस सूट दिया जाता है ना कि ऑक्सीजन मास्क हालांकि इस घटना के बाद पायलट और सभी क्रू मेंबर्स को सस्पेंड कर दिया गया। 

मेरा उद्देश्य जेट एयरवेज़ को बदनाम करना बिल्कुल भी नहीं है प्लेन में यात्रा करना कहीं अधिक सुरक्षित है आपके कार के कंपैरिजन में, बशर्ते पायलट कोई लापरवाही ना करें तो। 

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